सिकंदराराऊ 13 सितम्बर | आज हमारे देश मे हिंदी की बहुत दयनीय हालत है। हमारी हिंदी भाषा को सबसे अधिक हानि कॉन्वेंट कल्चर ने पहुचाया है।अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पढ़ने वाले हमारे बच्चों को हिंदी बोलने पर फाइन लगा दिया जाता है। वो रसखान को नही जानतेए कबीर को नही जानतेए तुलसीए सूरए मीरा को नहीं जानते। जो बच्चे न इन्हें जानते हैं न इनकी कविता मे बसी भारतीय संस्कृति को जानते हैं। जो देश अपनी संस्कृति से कट जाते है वो नष्ट हो जाते हैं।हमारी सरकारों को हिंदी भाषा को अनिवार्य करना होगा। तभी हमारी हिंदी को सम्मान मिलेगा। साथ ही हिंदी को रोज़गार की भाषा बनाने के प्रयास करना होगा।कवियों कलाकारों को सम्मानित करना होगा जिससे लोगो का नज़रिया हिंदी के प्रति सकारात्मक हो सके।

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