नई दिल्ली 04 मई | पूरे देश में बढ़ते कोरोना मामलों के बीच लोगों में भारी टेंशन हैं। इससे घबराकर लोग तरह-तरह के उपाय करने लग जाते हैं जोकि और भी ज्यादा घातक सिद्ध हो रहा है। एम्स निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने बताया कि जो भी मरीज बार-बार सीटी स्कैन करा रहे हैं वो जान लें कि वो एक बड़ा खतरा मोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीटी स्कैन  से कैंसर होने का खतरा हो रहा है।

सीटी स्कैन करा रहे हैं लोग

कोरोना वायरस की पहचान करने के लिए मरीजों को सीटी स्कैन करवाना पड़ रहा है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी रेडिएशन काफी खतरनाक होता है। एक एचआरसीटी स्कैन करीब तीन सौ एक्सरे के बराबर रेडिएशन देता है। इससे काफी नुकसान मरीज को हो सकता है। इसलिए बार-बार सीटी स्कैन कराने की आवश्यकता नहीं है। यह कहना है नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का। डॉ. गुलेरिया ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कई लोगों को कोरोना के लक्षण होने के बाद भी उनका कोविड टेस्ट निगेटिव आ रहा है जिसके बाद डॉक्टर उन्हें सीटी स्कैन कराने की सलाह दे रहे हैं लेकिन अगर कोरोना के हल्के लक्षण हैं तो सीटी स्कैन कराने की कोई जरूरत नहीं है। सीटी स्कैन सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है । इसे कराने के बाद कैंसर की संभावना बढ़ सकती है। डॉ. गुलेरिया ने कहा कि सीटी स्कैन और बायोमार्कर का  गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर ज्यादा हल्के लक्षण हैं तो सीटी स्कैन कराने का कोई फायदा नहीं है। यह बहुत हानिकारक है। एम्स के निदेशक ने आजकल बहुत ज्याद लोग सीटी स्कैन करा रहे हैं।

जब सीटी स्कैन की जरूरत नहीं है तो उसे कराकर आप खुद को नुकसान ज्यादा पहुंचा रहे हैं, क्योंकि आप खुद को रेडिएशन के संपर्क में ला रहे हैं। इससे बाद में कैंसर होने की संभावना बढ़ सकती है। डॉक्टर गुलेरिया ने होम आइसोलेशन में रह रहे लोगों को सलाह दी है कि वे अपने डॉक्टर से संपर्क करते रहें। सेचुरेशन 93 या उससे कम हो रही है, बेहोशी जैसे हालात हैं, छाती में दर्द हो रहा है तो एकदम डॉक्टर से संपर्क करें।

रेमिडिसिवर, टॉसलीजुमैब और प्लाज्मा नहीं है मुख्य ट्रीटमेंट

डॉ. गुलेरिया ने कहा कि कोरोना के मॉडरेट केस में भी मुख्य ट्रीटमेंट ऑक्सिजन है। ऑक्सिजन भी दवा है। उसके बाद स्टेरॉयड की जरूरत पड़ सकती है और ब्लड क्लॉटिंग ना हो इसके लिए एंटी कॉगलेंट। कोरोना के ये तीन ही मुख्य ट्रीटमेंट हैं। रेमडिसिविर, टॉसलीजुमैब और प्लाज्मा ये बाद में आता है। ये इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए हैं। अगर मरीज को ऑक्सिजन, स्टेरॉयड और एंटी कॉगलेंट मिल रही है तो बाकी चीजों की जरूरत नहीं है। स्टडी भी यही कहती हैं।

हल्के लक्षण में कोई दवा की जरूरत नहीं- डॉ गुलेरिया

डॉ. गुलेरिया के मुताबिक अगर आप कोरोना पॉजिटिव हैं मगर आपको सांस लेने में कोई परेशानी नहीं हो रही है, आपका ऑक्सिजन लेवल ठीक है और तेज बुखार नहीं आ रहा है तो बिल्कुल घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि न ही पॉजिटिव मरीज को ज्यादा दवाएं लेनी चाहिए। ये दवाएं उल्टा असर करती हैं और मरीज की सेहत खराब होने लगती है। एम्स डायरेक्टर ने कहा कि लोग बार-बार खून की जांच करवाते हैं जबकि जब तक डॉक्टर न कहें तो खुद से ही ये सब न करें। इससे आपको और टेंशन पैदा होती है।

कैंसर का खतरा

एम्स निदेशक ने कहा होम आइसोलेशन में रह रहे लोग अपने डॉक्टर से संपर्क करते रहें। सेचुरेशन 93 या उससे कम हो रही है, बेहोशी जैसे हालात हैं, छाती में दर्द हो रहा है तो एकदम डॉक्टर से संपर्क करें। उन्होंने आगे कहा कि आजकल बहुत ज़्यादा लोग सीटी स्कैन करा रहे हैं। जब सीटी स्कैन की जरूरत नहीं है तो उसे कराकर आप खुद को नुकसान ज़्यादा पहुंचा रहे हैं क्योंकि आप खुद को रेडिएशन के संपर्क में ला रहे हैं। इससे बाद में कैंसर होने की संभावना बढ़ सकती है ।

 

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