हाथरस 23 फरवरी | समाजवादी पार्टी कार्यालय पर राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर स्वच्छता के जनक महामानव और राष्ट्र संत गाडगे जी महाराज की 145 वी जयंती मनाई गई, जिसकी अगुवाई पूर्व प्रत्याशी रामनारायण काके ने की और सैकड़ों की संख्या में रजक समाज के लोग एकत्रित हुए | समाजवादी पार्टी के नेताओं व रजक समाज के लोगों ने संत गाडगे जी महाराज जी की छवि चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष जसवंत सिंह यादव के निर्देश पर कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला उपाध्यक्ष गिनेश यादव ने की | मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व सासनी ब्लाक प्रमुख ठाकुर महेंद्र सिंह सोलंकी रहे वही पूर्व विधानसभा प्रत्याशी रामनारायण काके ने बताया कि संत गाडगे महाराज गरीबों व निर्धनों के लिए महाराष्ट्र के कोने-कोने में अनेक धर्मशालाएं, गौशालाएं, विद्यालय, चिकित्सालय तथा छात्रावासों का निर्माण कराया। यह सब उन्होंने भीख मांग-मांगकर बनावाया, किंतु अपने सारे जीवन में इस महापुरुष ने अपने लिए एक कुटिया तक नहीं बनवाई । उन्होंने धर्मशालाओं के बरामदे या आसपास के किसी वृक्ष के नीचे ही अपनी सारी जिंदगी बिता दी। संत गाडगे ने एक लकड़ी, फटी-पुरानी चादर और मिट्टी का एक बर्तन जो खाने-पीने और कीर्तन के समय ढपली का काम करते थे, यही उनकी संपत्ति थी । इसी से उन्हें महाराष्ट्र के भिन्न-भिन्न भागों में कहीं मिट्टी के बर्तन वाले गाडगे बाबा व कहीं चीथड़े-गोदड़े वाले बाबा के नाम से पुकारा जाता था । गाडगे जी गरीब परिवार से है, उनके लिए समाज हमेशा याद करते है |  पैसे की तंगी हो तो खाने के बर्तन बेच दो, औरत के लिए कम दाम के कपड़े खरीदो, टूटे-फूटे मकान में रहो पर बच्चों को शिक्षा दिए बिना न रहो । आधुनिक भारत को जिन महापुरूषों पर गर्व होना चाहिए, उनमें राष्ट्रीय सन्त गाडगे बाबा का नाम सर्वोपरि है।धर्म के नाम पर होने वाली पशुबलि के भी वे विरोधी थे।यही नहीं, नशाखोरी, छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों तथा मजदूरों व किसानों के शोषण के भी वे प्रबल विरोधी थे । समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष गिनेश यादव कहा की गाडगे बाबा का जन्म 23 फरवरी 1876 को महाराष्ट्र के अमरावती जिले के शेणगांव अंजनगांव में हुआ था।उनका बचपन का नाम डेबूजी झिंगराजी जानोरकर था। संत गाडगे बाबा के जीवन का एकमात्र ध्येय था- लोक सेवा।दीन-दुखियों तथा उपेक्षितों की सेवा को ही वे ईश्वर भक्ति मानते थे।धार्मिक आडंबरों का उन्होंने प्रखर विरोध किया।उनका विश्वास था कि ईश्वर न तो तीर्थस्थानों में है और न मंदिरों में व न मूर्तियों में।संत गाडगे बाबा ने तीर्थस्थानों पर कईं बड़ी-बड़ी धर्मशालाएं इसीलिए स्थापित की थीं। उन्होंने बुद्ध की तरह ही अपना घर परिवार छोड़कर मानव कल्याण के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया ।

समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला महासचिव महेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि गाडगे जी महाराज ने अपने पूरे जीवन में अनेकों धर्मशाला,स्कूल बनवाए, उन्होंने गरीबों और कमजोर की सेवा को ईश्वर की सेवा माना और अशिक्षित होते हुए भी शिक्षा के क्षेत्र में बहुत स्कूलों का निर्माण कराया संत गाडगे जी महाराज ने जीवन में अनेकों धर्मशाला तथा स्कूल बनाने के बावजूद भी अपने लिए कोई भवन नहीं बनाया दे प्रत्येक रात किसी पेड़ के नीचे गुजार कर अपना जीवन यापन करते थे उन्होंने कमजोर गरीबों के लिए शिक्षा तथा सफाई का विशेष अभियान चलाया। आदि लोगों ने संत गाडगे जी के जीवन पर प्रकाश डालते इस मौके पर जिला प्रवक्ता रोहिताश यादव ,डॉ आरसी लाल प्रजापति, टेकपाल कुशवाहा, डॉ अकील अहमद कुरेशी, गंगा सिंह सेंगर ,मोहर सिंह बाबूजी ,बालकिशन यादव एडवोकेट, श्रीराम यादव, हरवीर सिंह तोमर, हेमंत गॉड , हाजी नवाब हसन, चिंटू शर्मा, सिया राम प्रजापति ,गोविंद सिंह सिसोदिया ,गौरीशंकर बघेल, वासित राजा ,श्यामवीर ,गोवर्धन सिंह, विजय राजपूत ,छोटेलाल प्रधान, सुनीता सिंह यदुवंशी, लाखन पहलवान ,राकेश चौधरी, मनीष चौधरी, अनिल दिक्षित राहुल तिवारी, आशीष राजपूत ,रमेश चंद दिवाकर राम भरोसे दिवाकर लक्ष्मी दिवाकर मुकेश दिवाकर बनवारीलाल रामवीर सिंह, मुकेश, हर्ष, पवन ,लाखन सिंह ,राकेश कुमार, वीरपाल सिंह, मनोज गंभीर, सिंह प्रभु दयाल ,बंटी, टिंकू, राधे राधे ,श्याम दिवाकर ,बृजमोहन, प्रेमचंद, विमल कुमार, हरिओम दिवाकर आजाद आदि लोग मौजूद रहे |

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