सिकंदराराऊ (हसायन) 22 फरवरी । बच्चों को बचपन से ही अच्छे संस्कार प्रदान करने के लिए बच्चों को आध्यात्मिक ज्ञान कराए जाने के लिए ज्ञानवर्धक पुस्तकों का अध्ययन कराना चाहिए। हमारे देश में बच्चों से भगवान ज्यादा प्रसन्न होते हैं। उक्त बातें गांव बनवारीपुर में स्थापित श्री बाँके बिहारी जी महाराज के उन्नीसवें प्राकट्योत्सव समारोह के दौरान आयोजित श्रीमद भागवत कथा के दौरान आचार्य देवकीनंदन ठाकुर ने कहीं। उन्होंने भक्त प्रहलाद, वामन अवतार व ध्रुव की कथा सुनाते हुए कहा कि बच्चों को भगवान को पाने के लिए सभी सांसरिक वस्तुओं का त्याग कर ईश्वर की खोज में चले गए थे। बच्चों का मन पूरी तरह से बचपन में निर्मल होता है। हम बच्चों को जैसी बात बताते व दिखाते हैं।
ठीक उसी तरह से बच्चे क्रिया करते है। भक्त प्रहलाद व ध्रुव ने भगवान को प्राप्त करने के लिए तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ा था। आचार्य देवकीनंदन ठाकुर ने हिन्दू धर्म का मान सम्मान बचाने के लिए अपनी पुरानी भारतीय संस्कृति को अपनाने की बात कहीं। श्रीमद भागवत कथा के दौरान वामन अवतार की कथा सुनाते हुए कहा कि राजा बलि ने बालक के रूप में वामन अवतार धारण करने के बाद राजा बलि के प्रेम को देखकर उसके ही द्वारपाल बन गए थे। बाद में लक्ष्मी जी ने राजा बलि को अपना भाई बनाकर अपने पति को द्वारपाल से छुटकारा दिलाकर अपने धाम को ले गई। कथा के दौरान आयोजक अवधेश जादौन ने अपनी पत्नी के साथ वामन भगवान के स्वरूप की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की। कथा के दौरान पूर्व विधायक यशपाल सिंह चौहान, राभबेटी जादौन, अरुण कुमार, सुधीर कुमार, भानुप्रताप जादौन, बसंत जादौन, सुशील जादौन, सुनील जादौन,चन्द्रभान सिंह जादौन,स्वर्ण कुमार सिंह,गोपाल कुमार,कृष्ण कुमार सिंह,शिवम कुमार सिंह,हिमांशु जादौन,गुड्डी देवी, मुन्नी देवी, मालती देवी, हेमलता सिंह, नीरज सिंह, हेमलता सिंह, भानुप्रताप जादौन, धर्मेंद्र सिंह जादौन मौजूद थे ।

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