गाजियाबाद 03 जून | कोराना वायरस के कारण देश में लॉकडाउन का असर अब धीरे-धीरे सामने आने लगा है | सरकार ने अनलॉक-1 का ऐलान कर दिया है और तमाम क्षेत्रों में छूट दी जा रही हैं | इस बीच गाजियाबाद से खबर है कि यहां देश की मशहूर साइकिल कंपनी एटलस ने आर्थिक तंगी के चलते कारखाना चलाने से हाथ खड़े कर दिए हैं | कंपनी का कहना है कि उनके पास अब कोई पैसा नहीं बचा है |

कंपनी ने कारखाना प्रबंधक के माध्यम से अपने कर्मचारियों के लिए बैठकी (ले-ऑफ) की सूचना दे दी है और इसे गाजियाबाद के उपश्रमायुक्त, संराधन अधिकारी, गाजियाबाद के साथ फैक्ट्री के मुख्य द्वार, नोटिस बोर्ड और कर्मचारी संगठनों के दफ्तर में प्रेषित कर दिया है | इसमें कहा गया है कि कंपनी पिछले कई सालों से भारी आर्थिक संकट से गुजर रही है | कंपनी ने सभी उपलब्ध फंड खर्च कर दिए हैं और स्थिति ये है कि कोई अन्य आय के स्रोत नहीं बचे हैं | यहां तक कि दैनिक खर्चों के लिए भी धन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है | सेवायोजक जब तक धन का प्रबंध नहीं कर लेते, तब तक वे कच्चा माल खरीदने के लिए भी असमर्थ हैं | ऐसी स्थिति में सेवायोजक फैक्ट्री चलाने की स्थिति में नहीं हैं | यह स्थिति तब तक बने रहने की आशंका है, जब तक सेवायोजक धन का प्रबंध न कर लें | सभी कर्मचारी 3 जून से बैठकी (ले-ऑफ) पर घोषित किए जाते हैं | इस दौरान कर्मचारी साप्ताहिक अवकाश छोड़कर रोज फैक्ट्री के गेट पर अपनी हाजिरी लगाएं नहीं तो वे प्रतिकर पाने के अधिकारी नहीं होंगे |

उन्होंने कहा कि दो दिन से कारखाना खुला है | उन्होंने 1 और 2 जून को कारखाने में काम किया, सफाई व्यवस्था के साथ काम हुआ | आज इन्होने गेट पर अचानक नोटिस लगा दिया और हमसे कहा कि आप हाजिरी लगाओ, अपने-अपने घर जाओ | सैलरी के बारे में भी कहा है कि आधा देंगे या नहीं देंगे, वो बाद की बात है | उन्होंने कहा कि इस कारखाने में करीब 1000 लोग काम करते हैं, ये सभी बेरोजगार हो गए हैं | मान लीजिए उन्होंने 5000 रुपये दिए भी तो उसमें तो हमारा किराया भी नहीं निकलेगा | वहीं कारखाने से प्रोडक्शन की बात पर कर्मचारी ने बताया कि लॉकडाउन से पहले डेढ़ लाख से 2 लाख तक साइकिल हमने बेचीं | लॉकडाउन में थोड़ा असर जरूर पड़ा है | प्रोडक्शन में कोई कमी नहीं थी | कर्मचारी ने कहा कि आर्थिक तंगी संभव नहीं है | उन्होंने बताया कि एक साल पहले इनकी मालमपुर में यूनिट थी, उसे करीब एक साल पहले इन्होंने ऐसे ही बंद कर दिया था | दूसरा सोनीपत में सबसे बड़ा प्लांट था, वो भी इन्होंने अभी बंद कर दिया है |