हाथरस 23 मई | अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा संचालित ऑनलाइन बौद्घिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में कल अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के ऑफिशियल फेसबुक पेज पर जिले के प्रमुख शिक्षाविद एवं समाजसेवी नीरज के शर्मा ने “भारतीय संस्कृति की वैज्ञानिकता” विषय पर व्याख्यान दिया। अपने व्याख्यान में नीरज के शर्मा ने बताया कि कैसे भारतीय संस्कृति विश्व की महानतम संस्कृति है? उन्होंने बताया कि जिस समय आज सर्वश्रेष्ठ होने का दंभ भरने वाली सभ्यताएं उचित वस्त्र एवं भोजन का अर्थ भी नहीं जानती थी उस समय भारत में स्वर्ण काल चल रहा था। गुप्त काल के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था विश्व की कुल अर्थव्यवस्था का लगभग 51% थी। आज से लगभग 3700 वर्ष पूर्व ऋग्वेद में नासदीय सूक्त द्वारा ब्रह्मांड की उत्पत्ति का वर्णन, संसार में अध्यात्म की गंगा श्रीमद्भगवद्गीता, चाणक्य के द्वारा विश्व के प्रथम नीतिशास्त्र “अर्थशास्त्र” की रचना, चाणक्य के द्वारा ही विश्व की प्रथम शल्य चिकित्सा, विश्व का प्रथम चिकित्सा शास्त्र आयुर्वेद, आइंस्टीन से हजारों वर्ष पूर्व ही नागार्जुन द्वारा सापेक्षता सिद्धांत, आर्यभट्ट द्वारा दशमलव प्रणाली एक शून्य सिद्धांत इत्यादि भारतीय संस्कृति की वैज्ञानिकता को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं। नीरज के शर्मा ने बताया कि आज कोरोना काल में भी जब सम्पूर्ण विश्व भयभीत है यह केवल भारतीय संस्कृति ही है जो जीवन और मरण को समान रूप से उत्सव के रूप में मनाने की शिक्षा देती आई है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे तार्किक बनें एवं विश्लेषनात्मक ज्ञान अर्जित करें जिससे कि वे भविष्य की चुनौतियों का सामना करते हुए भारत को पुनः विश्व गुरु पद पर प्रतिष्ठित कर सकें। फेसबुक लाइव कार्यक्रम को परिषद के जिला संगठन मंत्री अतुल भारद्वाज, जिला संयोजक शुभम कुशवाहा, जिला मीडिया संयोजक विकास शर्मा समेत सैकड़ों विद्यार्थियों तथा आम नागरिकों द्वारा देखा गया।

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