लखनऊ 22 मई | उत्तर प्रदेश सरकार की मानें तो अब तक देश के विभिन्न हिस्सों से प्रदेश में 12 लाख से ऊपर कामगार मजदूर वापस अपने घरों को आ चुके हैं | इन तमाम कवायदों के बीच में सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि एक तरफ प्रदेश में लगातार जहां कोरोना संक्रमितो की संख्या बढ़ रही थी, वहीं प्रवासी मजदूरों के आने से यह समस्या कई गुना ज्यादा बड़ी होती हुई दिखाई दे रही है | अब तक उत्तर प्रदेश में 1200 से ज्यादा प्रवासी मजदूरों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है | स्थानीय जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों ने माना है कि प्रवासी मजदूरों की वजह से लगातार चुनौतियां बढ़ रही हैं | लखनऊ के जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश कहते हैं, “राजधानी लखनऊ में अब तक 30 से ज़्यादा कोरोना पॉजिटिव केस प्रवासी कामगार मज़दूर के रूप में मिले है | अभी यह संख्या और ज्यादा हो सकती है लेकिन इनमें से ज़्यादातर लखनऊ ज़िले के नहीं हैं |”

उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों के माथे पर भी चिंता की लकीरें साफ दिखाई देती हैं | स्वास्थ्य विभाग का आंकड़ा तैयार करने वाली एजेंसी का मानना है कि अब तक जिन जिलों में आए कामगार मज़दूरों में कोरोना संक्रमण मिला है, ब्यौरा तैयार किया जा रहा है | जहां मज़दूर भारी तादाद में आए हैं वहां के “न्यूज़18 के स्थानीय रिपोर्टर” इस बात पर बल देते हैं कि हालात बहुत ज़्यादा ठीक नहीं हैं | पिछले 3 दिनों में सिर्फ बाराबंकी में 100 से ज़्यादा पॉजिटिव केस कामगार मज़दूरों से जुड़े हैं | बस्ती, सिद्धार्थ नगर, संतकबीर नगर, जौनपुर, बहराइच, श्रावस्ती, गाजीपुर, वाराणसी, आज़मगढ़, अम्बेडकर नगर, अयोध्या, सुल्तानपुर, बलिया, रायबरेली, प्रयागराज, फर्रुखाबाद, चित्रकूट, बलिया, कानपुर देहात, उन्नाव, कुशीनगर, बांदा, अमेठी, सीतापुर, गोंडा, प्रतापगढ़ में हालात ठीक नहीं हैं |