लखनऊ 22 मई | उत्तर प्रदेश में महाराष्ट्र, गुजरात या फिर अन्य राज्यों से ट्रेन, बस, ट्रक के जरिए प्रवासी मजदूरों के लौटने के बाद से कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। बस्ती में मुंबई से ट्रेन से लौटे 36 मजदूरों के पॉजिटिव मिलने के एक दिन बाद ही बाराबंकी, जौनपुर, वाराणसी, बरेली, सिद्धार्थनगर में 59 और प्रवासी मजदूर कोरोना संक्रमित मिले हैं।

पिछले 36 घंटों में बाराबंकी (14), जौनपुर (15), बरेली (18), वाराणसी (4), सिद्धार्थनगर (8) में कोरोना के नए मरीज मिलने से टेंशन और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल यूपी ही नहीं बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल में भी बड़ी संख्या में मुंबई और दिल्ली से प्रवासी मजदूर लौटे हैं। जब 59 में से 29 लोगों से बात की, जिन्हें उनके जिले के क्वारंटीन सेंटर में रखा गया है। ये 29 लोग कांदीवली, मलाड, कालवा और धारावी इलाकों से अपने घरों को लौटे थे।

जौनपुर के सीएमओ ने बताया कि पिछले 36 घंटे में जिले में सामने आए 16 पॉजिटिव केसों में से 15 हाल ही में मुंबई से लौटे हैं। उन्होंने बताया, ‘वे सभी सड़क मार्ग से ही लौटे हैं। इनके संपर्क में आए लोगों की पहचान के लिए हमने टीमें लगाई हैं। उन्हें ट्रैक कर स्क्रीनिंग की जाएगी।’ इसी तरह बाराबंकी में पॉजिटिव टेस्ट हुए सभी 14 लोग मुंब्रा और कालवा से लौटे हैं। 15-16 मई को उनके सैंपल लिए गए और फिर एक दिन पहले उन्हें पॉजिटिव पाया गया। ऐसे ही सिद्धार्थनगर में 11 नए केस में से 8 मुंबई से लौटे हैं।

बीमार बच्चे को कंधे पर लाद लुधियाना से कानपुर पहुंचा मजदूर परिवार15 दिनों से बच्चे को कंधे पर लादकर पैदल कानपुर पहुंचा परिवार। लुधियाना से 15 दिन पहले मध्य प्रदेश के सिंगरौली जाने के लिए चला था परिवार। बीमार बच्चे को चारपाई पर लादकर पैदल ही चल पड़ा परिवार। लुधियाना से कानपुर तक करीब 800 किलोमीटर की दूरी तय कर चुके इस परिवार की बेबसी पर किसी भी अधिकारी की नजर नहीं पड़ी। रामादेवी हाइवे पर परिवार ने लगाई पुलिस से गुहार।

ग्लोबल हेल्थ एंड हेल्थ पॉलिसी में रिसर्चर ने कहा, ‘मुंबई जैसे शहरी इलाकों से ग्रामीण क्षेत्रों की तरफ वायरस का प्रसार तो होना ही था। लॉकडाउन लगाए जाने से पहले ही मजदूरों को व्यवस्थित तरीके से बस और ट्रेन के जरिए उनके घरों तक पहुंचाया जाना चाहिए था। उस वक्त वायरस का प्रसार इतने बड़े पैमाने पर नहीं हुआ था। अब काफी लेट हो चुका है। अब तो वायरस भी लोगों के साथ गांवों और कस्बों तक पहुंच रहा है। समस्या यह है कि हम लोग स्क्रीन, आइसोलेट और टेस्टिंग के लिए जरूरी साधन ही नहीं हैं।’