सिकन्दराराऊ 19 मई | लॉकडाउन में कवि सम्मेलन का भी सिलसिला थम गया है लेकिन कवियों की कलम लगातार सृजन कर रही है। सिकन्दराराऊ के कवि अवशेष कुमार विमल के आवास पर उनका एक प्रशंसक विशाल यादव आवश्यक कार्य से मिलने आया तो उनसे ग़ज़ल सुनने की इच्छा प्रकट की। उन्होंने तुरन्त नई ताजा ग़ज़ल लिखना शुरू किया। लेखन लगातार 3 घण्टे चला। इस बीच ग़ज़ल के 201 शेर और 402 मिसरे हुए। प्रशंसक विशाल यादव ने मन भरकर शायरी का आनन्द लिया। ग़ज़ल के ज़्यादातर शेर समकालीन सन्दर्भ से जुड़े हुए थे, जिनमें कोरोना संकटकाल के परिवेश का चित्रण था।

ग़ज़ल के कुछ शेर हैं –

क्यों दिल पर हाथ और चेहरा बुझा है।
बताओ तो बताओ क्या हुआ है।।

तुम्हें भी हो गया है क्या कोरोना,
या कोई चेहरा में दिल में बसा है।।

पड़ी जब जान की तो भाग आये,
जो कहते गाँव में रक्खा ही क्या है।।

अभी तो लॉक डाउन चल रहा है,
खत्म सब दोस्ती का सिलसिला है।।

न जाना भूलके भी घर से बाहर,
पुलिस के हाथ में डण्डा लगा है।

फफोले पड़ गए हैं रास्ते में,
ये मज़मा घर को पैदल ही चला है।।

हमें पूछो हमारा दर्द दिल का,
हमारा खून पटरी पर बहा है।।

लिए जो गर्भ पैदल जा रही है,
बेचारी वो भी कोई देवी माँ है।।