सासनी 21 सितम्बर | कस्बे में चल रही रामलीला में आज धनुष यज्ञ, परशुराम-लक्ष्मण संवाद और सीता स्वयंवर की लीला का मंचन किया गया। राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के स्वयंवर का आयोजन किया। इसमें दूर-दूर से राजाओं-महाराजाओं को आमंत्रित किया गया। राजा जनक की शर्त थी कि जो भी राजा भगवान शिव के धनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी के साथ सीता जी का विवाह होगा। भगवान श्री राम व लक्ष्मण भी महर्षि विश्वामित्र के साथ स्वयंवर में पहुंचे हैं। धनुष को उठाने के लिए एक से बढ़कर एक ताकतवर राजा आगे आते हैं, लेकिन कोई भी धनुष को उठा नहीं पाता है। इसी बीच लंका का राजा रावण भी वहां पहुंच जाता है और धनुष को उठाने का प्रयास करता है। बाद में आकाशवाणी होने के कारण रावण लौट जाता है। इस पर राजा जनक दुखी होकर स्वयंवर में आए राजाओं से कहते हैं कि यहां कोई ऐसा महारथी नहीं है जो इस धनुष को उठा सके। इस पर लक्ष्मण को क्रोध आ जाता है और उनकी राजा जनक से तीखी नोकझोंक हो जाती है। बाद में महर्षि विश्वामित्र के कहने पर श्रीराम धनुष को उठाते हैं। इससे जनकपुरी में खुशी की लहर दौड़ जाती है और सीता जी श्रीराम के गले में वरमाला डाल देती हैं। तभी वहां परशुराम पहुंच जाते हैं और धनुष के टूटने पर क्रोधित होते हैं। इसके बाद लक्ष्मण और परशुराम के बीच संवाद होता है। इसके पश्चात धूमधाम से भगवान राम व सीता जी का विवाह संपन्न होता है। मंचन के दौरान कस्बे लोग एवं रामलीला कमेटी के सदस्य मौजूद रहे,

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