हाथरस 13 अप्रैल | घंटाघर स्थित अपना वाली धर्मशाला में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास आचार्य सीपुजी महाराज ने मधु-कैटभ जन्म एवं संहार और भगवान विष्णु का हृयग्रीव से युद्ध और उसका वध इत्यादि प्रसंग विस्तार से सुनाए । सीपुजी महाराज ने कहा कि प्राचीनकाल में पृथ्वी पर चारों ओर जल ही जल था, केवल भगवान विष्णु शेषनाग की शैय्या पर सो रहे थे कि उनके कान की मैल से मधु और कैटभ दो महापराक्रमी राक्षस उत्पन्न हुए। वे सोचने लगे कि हमारी उत्पत्ति का कारण क्या है। वे सोच ही रहे थे कि इतने में आकाश में गूंजता हुआ भगवती का महामंत्र उनके कानों में पड़ा । आकाशवाणी हुई कि दैत्यों तुम्हारी तपस्या से में प्रसन्न हूं कोई भी वरदान मांगो। दोनों दैत्यों ने वरदान मांगा कि हमें कोई भी दानव व देवता पराजित न कर सके। वरदान पाकर वे अभिमानी हो गए और जीव-जंतुओं और मनुष्यों को सताने लगे। भगवती की माया से भगवान विष्णु ने इन दोनों दैत्यों के मस्तकों को अपनी जांघों पर रखवाकर सुदर्शन चक्र से काट डाला। कथा के बीच- बीच में गायकों द्वारा मां दुर्गा के भजन सुनाए गए। ओढ़ के चुनरिया लाल मैं नाचूं मां के अंगना मे और सच्चा है दरबार तुम्हारा अम्बे मैया आऊं मैं बारंबार भजन पर श्रद्धालु झूम उठे। जयकारा शेरांवाली दा, बोल साच्चे दरबार की जय इत्यादि पवित्र उदघोष से कथा पंडाल गूंज उठा। कार्यक्रम मे गंगासरण मैदा वाले, कन्हैया वार्ष्णेय, हरिमोहन वार्ष्णेय, विष्णु मोहन वार्ष्णेय, उमेश वार्ष्णेय, अशोक वार्ष्णेय, रामकिशन वार्ष्णेय आदि लोग उपस्थित थे |