Hamara Hathras

09/07/2024 6:36 pm

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हाथरस 09 जुलाई । एक ही कान से लगातार मोबाइल पर बात करने, ईयर फोन, ईयर बड्स और तेज आवाज से युवाओं की सुनने की क्षमता कम हो रही है। कम सुनाई देने को दो से चार साल तक नजरअंदाज करने वालेयुवा बहरेपन के शिकार हो रहे हैं। ईयरफोन के इस्तेमाल से युवाओं में सुनने की क्षमता कम हो रही। साथ ही सड़क क्रॉसिंग के समय भी ईयरफोन के इस्तेमाल से शहर में दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि 20 से 40 की आयु के 75 प्रतिशत युवाओं में बहरेपन की समस्या का मुख्य कारण मोबाइल का ज्यादा उपयोग करना है। यंगस्टर्स में हैडफोन के लगातार प्रयोग से सुनने की क्षमता 40 से 50 डेसीबल तक कम हो रही है। इसकी वजह हैडफोन पर लाउड म्यूजिक सुनना, लगातार फोन के संपर्क में रहना, घंटों फोन पर बात करना आदि है। ईएनटी विभाग के डॉक्टर्स का कहना है कि हर दिन पेशेंट बहरेपन का इलाज करवाने आ रहे हैं।

ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ रोहित गुप्ता का कहना है कि तेज आवाज में सुनने, मोबाइल पर लंबी बात व ईयर फोन का इस्तेमाल करने वाले युवाओं में सुनने की क्षमता घट रही है। ओपीडी में हर हफ्ते 15 से 40 वर्ष की उम्र के युवा कम सुनने वाले आ रहे हैं। इन्हें डॉक्टर दवाओं के साथ ही हियरिंग ऐड (सुनने वाली मशीन) लगाने की सलाह दे रहे हैं। इसके अलावा केजीएमयू, लोहिया संस्थान, की ओपीडी में रोजाना 100 युवा कम सुनने की समस्या के साथ पहुंच रहे हैं। डॉ रोहित गुप्ता के मुताबिक कानों को सुनने के लिए सामान्य आवाज 90 डेसिबल से कम होनी चाहिए। लेकिप पार्टी हो या घर हर जगह टीवी, डीजे आदि में 120 डेसिबल से ज्यादा शोर होता है।

दूर की आवाज सुनने में परेशानी आती है –
ईयर बड्स ध्वनि तरंगें पैदा करते हैं जिनसे कान के पर्दे वाइब्रेट करते हैं। महीन हड्डियों के जरिए ये वाइब्रेशन कानों के अंदरूनी हिस्सों में पहुंचती है। इस हिस्से में तरल पदार्थ के साथ हजारों बाल होते हैं। जब ये बाइब्रेशन यहां पहुंचती है तो बाल हिलते-डुलते हैं। लगातार तेज आवाज जाने से बाल जिन कोशिकाओं से जुड़े होते हैं उनकी क्षमता कमजोर पड़ जाती है। लंबे समय तक ईयर फोन पर म्यूजिक सुनने से कान के पर्दे की मोटाई पर प्रभाव पड़ता है। दूर की आवाज सुनने में परेशानी के अलावा बहरापन बढ़ रहा है। ईएनटी स्पेशलिस्ट सुनील अग्रवाल ने बताया कि एक घंटे से अधिक 80 डेसीबल से तेज वॉल्यूम में सॉन्ग्स सुनते हैं तो लगभग 5 या 6 साल में सुनने की क्षमता कमजोर हो सकती है या स्थाई रूप से बहरापन भी हो सकता है। सुनने की नस बहुत सेंसेटिव होती है, ज्यादा साउंड आने पर नस परेशान हो जाती है। फोन के लगातार इस्तेमाल से एंग्जाइटी, डिप्रेशन, नींद नहीं आना जैसी बीमारियां भी सामने आ रही हैं। कई लोगों को हम व्यवसाय बदलने के लिए भी कहते हैं। फोन से होने वाली समस्याओं से प्रभावितों में 75 प्रतिशत युवा हैं।

ज्यादा साउंड कान के पर्दे खराब कर सकती है 

लाउड वॉल्यूम में म्यूजिक सुनने से मानसिक समस्या होने के साथ-साथ हार्ट इश्यू और ब्रेन को इनडायरेक्ट खतरा हो सकता है। कई यंगस्टर्स इस बीमारी को सीनियर सिटीजन की समस्या मानते हैं, लेकिन हियरिंग लॉस की समस्या अब 20 वर्ष की उम्र में ही देखने को मिल रही है। वहीं ईयर फोन पर लंबे समय तक लाउड म्यूजिक सुनने से कान की नसें डेड हो जाती हैं। इससे सुनने की क्षमता पूरी तरह चली जाती है। प्रतिदिन आठ घंटे 90 डेसीबल साउंड सुन सकते हैं। इससे ज्यादा साउंड कान के पर्दे खराब कर सकता है।

बहरेपन के लक्षण

  • कान में सीटी की आवाज सुनाई देना।
  • कम सुनाई देना, किसी की बात ठीक से सुनाई नहीं देना
  • फोन पर बात करने में परेशानी
  • तेज आवाज में टीवी देखना या गाने सुनना
  • चक्कर आना, सनसनाहट, नींद नहीं आना, सिर दर्द, कान में दर्द
  • चिड़चिड़ापन, एंग्जाइटी और ब्लड प्रेशर बढ़ना

कैसे करें बचाव 

  • महीने में एक बार कानों की जांच करवाएं
  • लंबे समय तक फोन पर बात नहीं करें
  • बहुत जरूरत होने पर ईयर बड के बजाय ईयरफोन का इस्तेमाल करें।
  • अगर आपका प्रोफेशन कॉल सेंटर या फोन पर काम करने का है तो प्रति घंटे 10 मिनट का ब्रेक लें, फ्रेश एयर में जाएं।
  • जिनके कानों का ऑपरेशन हुआ है, सुनने में दिक्कत है उन्हें विशेष ध्यान देना चाहिए।

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