Hamara Hathras

16/05/2024 11:34 pm

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नई दिल्ली 02 मई। ब्रिटिश वैक्सीन निर्माता एस्ट्राजेनेका ने यूके की हाई कोर्ट में माना कि उसकी कोविड वैक्सीन से खून जमने का खतरा हो सकता है। एस्ट्राजेनेका की इस स्वीकारोक्ति का साइड इफेक्ट भारत में उसकी सहयोगी कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया को झेलना पड़ सकता है। अदार पूनावाला की कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ने एस्ट्राजेनेका की मदद से भारत में कोविशिल्ड वैक्सीन का उत्पादन किया था। कथित तौर पर वही कोविशील्ड लगाने से दो लड़कियों की मौत हो गई थी। अब उनके पिता का कहना है कि चूंकि एस्ट्राजेनेका ने मान लिया है कि उसकी वैक्सीन जानलेवा हो सकती है, इसलिए इसका उत्पादन करने वाली कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट के खिलाफ मुकदमा करेंगे।

अब नहीं रहीं ऋतिका और करुण्या

ऋतिका श्री ऑम्ट्री और करुण्या नाम की लड़कियों की कोविड महामारी के दौरान मौत हो गई। दोनों ने कोविशील्ड वैक्सीन लगवाई थी। 18 साल की ऋतिका ने 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद 2021 में कोविड महामारी के समय आर्किटेक्चर की पढ़ाई कर रही थीं। मई में उन्हें कोविशील्ड की पहली खुराक दी गई थी। हालांकि, एक हफ्ते बाद ही ऋतिका को तेज बुखार आया, उल्टी होने लगी। हालत इतनी खराब हो गई कि वो चल-फिर भी नहीं पाती थी। एमआरआई स्कैन से पता चला कि उसके मस्तिष्क में रक्त के कई थक्के जमे थे और खून का रिसाव हो रहा था। दो हफ्तों के भीतर ऋतिका की दुखद मौत हो गई।

क्या कोविड वैक्सीन ने ली दोनों लड़कियों की जान

ऋतिका के माता-पिता उसकी मौत के सही कारण से अनजान थे। दिसंबर 2021 में एक आरटीआई के माध्यम से उसके परिवार को पता चला कि रितिका को टीटीटी (थ्रोम्बोसिस विद थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम) हुआ था और ‘वैक्सीन रिएक्शन’ के कारण उसकी मृत्यु हुई थी। इसी तरह, वेणुगोपाल गोविंदन की बेटी करुण्या की भी जुलाई 2021 में कोविड टीका लगवाने के एक महीने बाद मृत्यु हो गई। तब वैक्सीन पर राष्ट्रीय समिति ने यह कहते हुए वैक्सीन से मौत की आशंका को खारिज कर दिया था कि इसका पर्यूप्त सबूत नहीं है।

एस्ट्राजेनेका के खिलाफ मुकदमों की अंबार

हालांकि, दवा कंपनी के खिलाफ मुकदमों पर मुकदमें हो रहे हैं, जिनमें आरोप लगाया जा रहा है कि उसके कोविड-19 टीके के कारण मौतें और गंभीर नुकसान हुआ है। टीटीएस (थ्रोम्बोसिस विद थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम) एक गंभीर प्रतिकूल प्रतिक्रिया है जिसके कारण खून का थक्का बनता है और ब्लड प्लेटलेट का स्तर कम हो जाता है। एस्ट्राजेनेका ने कानूनी दस्तावेजों में स्वीकार किया है कि उसके कोविड-19 टीके में टीटीएस को प्रेरित करने की क्षमता है। सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड वैक्सीन अब यूके में नहीं दी जा रही है। हालांकि स्वतंत्र अध्ययनों ने महामारी से लड़ने में इसकी प्रभावशीलता को साबित कर दिया है, लेकिन असामान्य दुष्प्रभावों के सामने आने के कारण नियामक जांच और कानूनी उपाय किए गए हैं। कानूनी कार्यवाही जारी है क्योंकि वैक्सीन से प्रभावित व्यक्ति और उनके परिवार उचित मुआवजा और वैक्सीन से होने वाली समस्याओं को स्वीकार करने की मांग कर रहे हैं।

 

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