हाथरस 19 सितम्बर | श्री दाऊजी महाराज 111 वें मेले में आयोजित विधिक साक्षरता शिविर में आज जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में पशु क्रूरता एवं उनके सरक्षण विषय पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन जनपद न्यायाधीश अध्यक्ष मृदुला कुमार के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव कुमुद उपाध्याय की अध्यक्षता में किया गया। सचिव द्वारा उपस्थित जनता को जानकारी देते हुये बताया कि जानवरों के प्रति क्रूरता, जिसे पशु दुर्व्यवहार, पशु उपेक्षा या पशु क्रूरता भी कहा जाता है, क्योकि मानव द्वारा गैर-मानव जानवरों पर पीड़ा या नुकसान किया जाता है। यह कारण नुकसान या पीड़ा का कारण हो सकता है, जैसे मनोरंजन के लिए जानवरों को मारना जानवरों के प्रति क्रूरता की श्रेणी में शामिल किया गया है। पशु क्रूरता के लिये विभिन्न कानून बने हुये है। इसके अतिरिक्त, पशु क्रूरता को नियंत्रित करने वाले कानून अलग-अलग देशों में भिन्न होते हैं। हालांकि यह संयुक्त राज्य अमेरिका में नियमित अभ्यास है, यूरोपीय संघ (ईयू) में नियमित अभ्यास के हिस्से के रूप में एक सुअर की पूंछ को डॉक करना प्रतिबंधित है। उन्होने कहा कि अनावश्यक और मानवीय शब्द व्यापक रूप से भिन्न व्याख्याओं के अधीन हैं और जानवरों के बुनियादी अधिकार हैं। हमें जानवरों के प्रति कू्ररता नही करनी चाहिए। शिविर का संचालन स्थायी लोक अदालत केे सदस्य मनीष कौशिक द्वारा किया गया। संचालन के साथ-साथ उन्होने कहा कि पशुओं के प्रति यदि कोई कू्ररता करता है तो उसे दण्ड दिया जा सकता है।