हाथरस 30 अगस्त | सहपऊ के सुल्तानपुर गांव वासी अजय की चार माह की बेटी वंशिका जन्म से ही क्लेफ्ट लिप (कटे होठ) से ग्रस्त थी। सहपऊ सीएचसी की आरबीएसके टीम को इसकी जानकारी मिली तो बच्ची को टीम ने मेडिकल कॉलेज अलीगढ़ में विजिट करवाया । कुछ ही दिनों में वंशिका का वरुण हॉस्पिटल में निःशुल्क ऑपरेशन हुआ । वंशिका के पिता ने बताया कि अब बच्ची अब पूर्णतः स्वस्थ है । सासनी के अकबरपुर के किशोरी लाल की बेटी शिवानी क्लेफ्ट पेलेट (कटे तालु) से ग्रस्त थी । सासनी सीएचसी की आरबीएसके टीम की सदस्य डॉ. इंदु, डॉ. अलका और डॉ नीतू को जब इस बात की जानकारी हुई तो उन्होंने शिवानी को मेडिकल कॉलेज में दिखावया । जिसके कुछ दिन बाद उसका निःशुल्क ऑपरेशन हुआ।

वंशिका और शिवानी तो सिर्फ बानगी भर हैं। ऐसे कई बच्चे हैं जो राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत निःशुल्क लाभान्वित हो रहे हैं। योजना के डॉ. सन्तोष कुमार, नोडल अधिकारी आरबीएसके ने बताया कि जिले में इस वर्ष जन्मजात दोष से पीड़ित 7 बच्चे निःशुल्क लाभान्वित हो चुके हैं और 29 बच्चे जेएनएमसी (जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, अलीगढ़) की निगरानी में है और उपचार ले रहे हैं | उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत मेडिकल टीम बच्चों की बीमारियों की स्क्रीनिंग कर मरीजों का इलाज कर रही है। योजना के तहत न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट, डाउन सिंड्रोम, कटा होंठ व तालु, टेढ़े मेढ़े पैर, डेवलपमेंट डिस्प्लेशिया ऑफ हिप, जन्मजात मोतियाबिंद, जन्मजात बहरापन, कंजेनाइटल, हार्ट डिजीज, एनीमिया और विटामिन ए की कमी, रिकेट्स, अति कुपोषण, चर्म रोग आदि बीमारियों को चिन्हित कर उसका इलाज किया जाता है। सहपऊ सीएचसी के डॉ. अवधेश कुमार वार्ष्णेय ने बताया कि वंशिका के जन्म के समय चेहरे और मुंह के टिश्यू ठीक से आपस में नहीं जुड़ते थे । इसकी वजह से उसको भविष्य में काफी तकलीफ रहती । अब वह सामान्य बच्चों की तरह खुशहाल जिंदगी जी सकेगी । डॉ. राजेश, मेडिकल ऑफिसर आरबीएसके ने बताया कि आरबीएसके के तहत जन्मजात दोष से परेशान बच्चों का मुफ्त में इलाज कराया जा रहा है।
​​ इन्सेट क्या है योजना और किसको मिलता है लाभ राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम को लागू करने का मुख्य उद्देश्य बच्चों विशेषकर नवजात शिशुओं उच्च मृत्यु दर को नियंत्रित करना है । योजना के अंतर्गत नवजात शिशु से लेकर 18 वर्ष के सभी बच्चो के अंदर की खामियों को ढूंढ़ना और उनका इलाज करना मुख्य उद्देश्य है।