नई दिल्ली 06 जून | भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने सोमवार को टाइप 1 मधुमेह के मैनेजमेंट के लिए दिशानिर्देश जारी किए। यह गाइडलाइंस ऐसे समय में आई हैं, जब कोरोना वायरस महामारी ने डायबिटीज मरीजों को असमान रूप से प्रभावित किया है। जिससे उन्हें गंभीर बीमारी और मृत्यु दर के लिए हाई रिस्क का सामना करना पड़ रहा है। रिसर्च बॉडी आईसीएमआर ने पहली बार टाइप 1 डायबिटीज के लिए गाइडलाइंस जारी की है। इससे पहले इसे टाइप 2 मधुमेह के लिए जारी किया गया है। भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी वयस्क इस बीमारी का घर है। दुनिया में मधुमेह से पीड़ित हर 6वां व्यक्ति एक भारतीय है।

भारत में सबसे अधिक केस

आईसीएमआर ने दिशानिर्देशों में कहा, ‘दुनिया में 10 लाख से अधिक बच्चों और किशोरों में टाइप 1 डायबिटीज है। इंटरनेशनल मधुमेह महासंघ के हालिया अनुमान बताते हैं कि भारत में टाइप 1 डायबिटीज के सबसे अधिक केस हैं।’ स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव और आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव के टाइम 1 डायबिटीज के प्रबंधन के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं।

पीड़ितों की संख्या में 150% वृद्धि

आईसीएमआर की रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन दशकों में देश में डायबिटीज से पीड़ित लोगों की संख्या में 150% की बढ़ोतरी हुई है। प्री डायबिटीज का बढ़ता प्रचलन निकट भविष्य में मधुमेह में और वृद्धि का संकेत देता है। आईसीएमआर के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए आईएएनएस की रिपोर्ट में कहा गया, ‘देश में मधुमेह उच्च से मध्यम आय वर्ग और समाज के वंचित वर्गों तक पहुंच गया है।’

अत्यधिक चिंता का विषय

आईसीएमआर ने दिशानिर्देशों में रेखांकित किया है कि जिस उम्र में टाइप 2 मधुमेह पेश कर रहा है। उसमें प्रगतिशील कमी, शहरी और ग्रामीण दोनों क्षत्रों में 25-34 साल के आयु वर्ग में बीमारी की व्यापकता स्पष्ट हो रही है। यह अत्यधिक चिंता का विषय है। आईसीएमआर टाइप 1 डायबिटी दिेशानिर्देश बच्चों, किशोरों और वयस्कों में मधुमेह की देखभाल पर सलाह प्रदान करने वाला एक व्यापक दस्तावेज है। इन दिशानिर्देशों के सभी अध्यायों को हाल के दिनों में हुई वैज्ञानिकों ज्ञान और नैदानिक देखभाल में प्रगति को दर्शाने के लिए गठन के साथ प्रदान किया गया है।