नई दिल्ली 22 मई | कोरोनावायरस से पस्त इकॉनमी को एक और बूस्टर देते हुए केंद्रीय बैंक RBI ने रीपो रेट में और कटौती का ऐलान किया है। रीपो रेट में 40 बीपीएस की कटौती कर दी गई है, जिसके बाद नया रेट 4% हो गया है। इतनी ही कटौती रिवर्स रीपो रेट में की गई है, जो अब 3.25% हो गया है। इस कदम से आपकी ईएमआई का बोझ कुछ कम होगा। साथ ही ईएमआई मोराटोरियम को तीन महीने आगे बढ़ा दिया गया है।कोरोना के लॉकडाउन के बाद से यह तीसरी बार है जब आरबीआई ने कराहती इकॉनमी को देखते हुए राहतों का ऐलान किया। सबसे पहले 27 मार्च को और उसके बाद 17 अप्रैल को RBI ने कई तरह की राहतों का ऐलान किया था, जिसमें ईएमआई मोराटोरियम जैसे बड़े ऐलान किए गए थे।
रीपो रेट क्या है? –

जब हमें पैसे की जरूरत हो और अपना बैंक अकाउंट खाली हो तो हम बैंक से कर्ज लेते हैं। इसके बदले हम बैंक को ब्याज चुकाते हैं। इसी तरह बैंक को भी अपनी जरूरत या रोजमर्रा के कामकाज के लिए काफी रकम की जरूरत पड़ती है। इसके लिए बैंक भारतीय रिजर्व बैंक से कर्ज लेते हैं। बैंक इस लोन पर रिजर्व बैंक को जिस दर ब्याज चुकाते हैं, उसे रीपो रेट कहते हैं।

रीपो रेट का आप पर असर- जब बैंक को रिजर्व बैंक से कम ब्याज दर पर लोन मिलेगा तो उनके फंड जुटाने की लागत कम होगी। इस वजह से वे अपने ग्राहकों को सस्ता कर्ज दे सकते हैं। इसका मतलब यह है कि रीपो रेट कम होने पर आपके लिए होम, कार या पर्सनल लोन पर ब्याज की दरें कम हो सकती हैं।

रिवर्स रीपो रेट- रिवर्स रीपो रेट रीपो रेट से उलटा होता है। बैंकों के पास दिनभर के कामकाज के बाद बहुत बार बड़ी रकम शेष बच जाती है। बैंक यह रकम रिजर्व बैंक में रख सकते हैं, जिस पर उन्हें ब्याज भी मिलता है। जिस दर पर यह ब्याज मिलता है, उसे रिवर्स रीपो रेट कहते हैं। अगर रिजर्व बैंक को लगता है कि बाजार में बहुत ज्यादा नकदी है, तो वह रिवर्स रीपो दर में बढ़ोतरी कर देता है, जिससे बैंक ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपना धन रिजर्व बैंक के पास रखने को प्रोत्साहित होते हैं और इस तरह उनके पास बाजार में छोड़ने के लिए कम धन बचता है।

3 महीने के लिए बढ़ा EMI मोराटोरियम-
27 मार्च को किए गए मोराटोरियम को अब 3 महीने के लिए बढ़ा दिया गया है। तीन महीने के लिए दिए गए हर तरह की राहत को अब और तीन महीने के लिए बढ़ा दिया गया है। यानी मोराटोरियम 1 जून से 31 अगस्त तक के लिए बढ़ा दिया गया है, आपको और तीन महीने के लिए लोन की किस्त टालने का ऑप्शन मिल गया है।
इसके अलावा, सिडबी को अतिरिक्त फ्लेक्सिबिलिटी का ऐलान किया गया। 90 दिन के टर्म लोन के लिए 90 दिनों य़ानी 3 महीने का और एक्टेंशन दिया गया है। इससे एमएसएमई सेक्टर को अडिशनल सपॉर्ट मिलेगा।

नेगेटिव रहेगी GDP-
RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने जीडीपी को लेकर चिंता जताई और कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 में ग्रोथ नेगेटिव टिरिटरी में रह सकती है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा झटका प्राइवेट कन्जंप्शन को लगा है। कन्ज्यूमर ड्यूरेबल्स का प्रॉडक्शन मार्च 2020 में 33% घट गया। वहीं मर्केंडाइज एक्सपोर्ट 30 साल के सबसे खराब स्तर पर पहुंच गया है।

दूसरी छमाही में घटेगी महंगाई-

दास ने कहा, साल की पहली छमाही में महंगाई उच्च स्तर पर रह सकती है लेकिन दूसरी छमाही में इसमें गिरावट आने की उम्मीद है। तीसरी-चौथी छमाही में यह 4 फीसदी से नीचे आ सकती है।

आयात-निर्यात को बढ़ावा-
आयात-निर्यात को बूस्ट करने के लिए RBI ने कई ऐलान किए। प्रीशिपमेंट और पोस्ट शिपमेंट के लिए एक्सपोर्ट क्रेडिट के परमिसिबल पीरियड को 1 साल से बढ़ाकर 15 महीने के लिए कर दिया गया। US डॉलर स्वॉप फसिलिटी के लिए एक्सिम बैंक को 15000 करोड़ रुपये का आवंटन।

केंद्र ने दिया आत्मनिर्भर भारत पैकेज-
देश में कोरोना संकट और लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान से निपटने के लिए मोदी सरकार ने करीब 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया था जिसे आत्मनिर्भर भारत पैकेज नाम दिया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई को देश के नाम संबोधन में इसकी घोषणा की थी। इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार पांच दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विस्तार से अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के लिए किए गए उपायों की घोषणा की थी। इसमें एमएसएमई को बिना गारंटी आसान लोन के लिए 3 लाख करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई।

17 अप्रैल को दी थीं कई राहतें-
इसस पहले 17 अप्रैल को आरबीआई ने कोरोना संकट और लॉकडाउन से प्रभावित अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए कई तरह की राहत का ऐलान किया था। रिवर्स रीपो रेट में 25 आधार अंक की कटौती की गई थी जिससे यह 4 फीसदी से घटकर 3.75 फीसदी हो गया। इससे बैंकों को कर्ज मिलने में दिक्कत नहीं होगी। केंद्रीय बैंक ने छोटे और मझोले आकार की कंपनियों को नकदी संकट से निजात देने के लिए टीएलटीआरओ 2.0 का ऐलान किया था। इसकी शुरुआत 50 हजार करोड़ रुपये से की गई थी। इसे स्थिति के मद्देनजर बाद में बढ़ाने की भी बात कही गई थी। टीएलटीआरओ 2.0 के तहत कुल राशि का आधा हिस्सा छोटी और मझोली कंपनियों, एमएफआई और एनबीएफसी को दिया गया था।

मार्च में दिया था EMI पर मोराटोरियम-
पहले मार्च में भी आरबीआई ने बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को कोरोना की वजह से टर्म लोन की किस्त वसूली तीन महीने तक टालने की अनुमति दी थी। कोरोना की वजह से मौद्रिक नीति समीक्षा तय समय से पहले पेश कर दी गई थी। आरबीआई गवर्नर ने कहा था कि बैंकों को यह अनुमति दी जा रही है कि वे टर्म लोन के मामले में ग्राहकों की ईएमआई वसूली तीन महीने के लिए टाल दें। कर्ज वापसी न होने को बैंकों को इसे एनपीए खाते में न रखने की छूट दी जाएगी।

इससे पहले केंद्रीय बैंक एक डायरेक्टर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे सतीश काशीनाथ मराठे ने मोदी सरकार के राहत पैकेज पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि तीन महीने का मोरेटोरियम काफी नहीं है और एनपीए में नरमी को राहत पैकेज का हिस्सा होना चाहिए था।