सिकंदराराऊ 01 मई | विमल साहित्य संवर्धक संस्था के तत्वावधान में मजदूर दिवस के उपलक्ष्य में लॉकडाउन का पालन करते हुए ऑनलाइन कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। कवि सम्मेलन संस्था कार्यालय सिकन्दराराऊ से संचालित किया गया। जिसमें दूर दराज के कवियों द्वारा मेहनतकश वर्ग को समर्पित समकालीन सन्दर्भ की रचनाएँ सुनाई गयीं। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता समाजसेवी हरपाल सिंह यादव तथा एवं संचालन शिवम कुमार आजाद ने किया। अलीगढ़ के तेजवीर सिंह त्यागी एडवोकेट मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कवि सम्मेलन की शुरुआत मुख्य अतिथि एवं अध्यक्ष द्वारा ग्रुप में माँ शारदे के समक्ष औपचारिक रूप से दीप प्रज्वलित करने के बाद हुई। सभी आमन्त्रित कवियों को संस्था के पदाधिकारियों द्वारा सम्मान पत्र प्रेषित करते हुए सम्मानित किया गया। उसके बाद अलीगढ़ के कवि मनोज नागर की वाणी वंदना से काव्यपाठ प्रारम्भ किया गया।

घुमक्कड़ कवि गाफिल स्वामी ने पढ़ा –
मेहनत करता रातदिन,रहा मजे से दूर !
श्रमजीवी इंसान का, नाम पड़ा मजदूर !!

ओजकवि भुवनेश चैहान चिंतन ने खैर से पढ़ा-
कोरोना ने कर दियौ,सारो जग मजबूर।
पहले साहूकार थे,अब सब हैं मजदूर।।

डॉ. गोविन्द श्गजबश् ने रायबरेली से पढ़ा –
तुम्हारी और हमारी सोच में बस फर्क है इतना।
तुम्हें बस हिन्दू प्यारे, हमको हिंदुस्तान प्यारा है।

युवा गीतकार शिवम खेरवार ने एटा से पढ़ा-
राम! किसी को नहीं दिखा जब, मजदूरों का दिल।
फफक-फफक तब रोया रामू, दीवारों से मिल।

मान सिंह श्मनहरश् ने आगरा से पढ़ा –
कर मजदूरी दिन कटे , तारे गिन-गिन रात।
आने को दो रोज में, बेटी की बारात ।।

हरिभान सिंह ष्हरिष् ने सादाबाद से सुनाया –
मजदूरी करते बहुत, देखे है मजदूर।
जीवन यापन के लिए, रहते घर से दूर।।

कवयित्री रेनू सिंह जादौन ने टूण्डला से पढ़ा –
घड़ी विपदा की आई है धरो मन धीर तुम प्यारे,
बढ़ाती मान भारत का वही तस्वीर तुम प्यारे।

हास्य कवि उत्कर्ष उत्तम ने लालगंज से पढ़ा –
मेरे रब कर ले बस इक ये दुआ कुबूल मेरी।
जा के फस जाऊं उसके साथ लाकडाउन में।

कवयित्री शोभना ऋतु ने जयपुर से पढ़ा-
मुसलसल बात उनसे हो रही है,
हमारा इश्क खुलता जा रहा है सस

राजवीर सिंह भारती ने भिण्ड से पढ़ा-
केतकी के फूल यदि पूजा में चढाये जाते,
गेंदा और गुलाब कौन तोड़ के मंगावतौ।

संचालक शिवम आजाद ने पढ़ा-
जनता के कर्फ्यू से हमने कुछ ऐसा कर डाला है।
संकट भारत की भूमि से कुछ हद तक हर डाला है।।

अवशेष मानवतावादी ने पढ़ा –
दिन में परिश्रम से हाथों में छाले पड़े।
शाम को फिर भी रोटी के लाले पड़े।।

मनोज कुमार नागर ने अलीगढ़ से पढ़ा –
मिले निर्देश जो हमको, करेंगे हम सभी पालनय
सुनिश्चित जीत करनी है, ये कोरोना हराना है।।

इनके अलावा शाहजहांपुर से इशरत सगीर, सरोज झा झारखण्डी, झारखण्ड से राकेश नाजुक, अलीगढ़ से कविता भारद्वाज ने भी काव्यपाठ किया।