नई दिल्ली 07 नवंबर | आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को दिए गए आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर लग गई है। चीफ जस्टिस यूयू ललित के नेतृत्व में 5 जजों की पीठ ने 3:2 से संविधान के 103वें संशोधन के पक्ष में फैसला सुनाया। हालांकि, चीफ जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस रवींद्र भट ने EWS कोटा के खिलाफ अपनी राय रखी। बाकी तीन जजों ने कहा यह संशोधन संविधान के मूल भावना के खिलाफ नहीं है। गौरतलब है EWS कोटे में सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आर्थिक आधार पर मिला हुआ है आरक्षण। इस फैसले को दी गयी थी चुनौती। शीर्ष अदालत ने आरक्षण पर रोक लगाने से किया था इनकार। इस फैसले के साथ ही अब देश में आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण जारी रहेगा।

EWS कोटे पर फैसला, जानें कौन जज पक्ष में कौन विपक्ष में

फैसला पक्ष/विरोध
चीफ जस्टिस यूयू ललित विरोध में
जस्टिस रवींद्र भट विरोध में
जस्टिस जेबी पारदीवाला पक्ष में
जस्टिस बेला त्रिवेदी पक्ष में
जस्टिस दिनेश माहेश्वरी पक्ष में
3:2 से EWS कोटा के पक्ष में फैसला
चीफ जस्टिस यूयू ललित ने EWS कोटे के खिलाफ राय रखी है। उन्होंने कहा कि वह जस्टिस भट के निर्णय के साथ हैं। इस तरह EWS कोटे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का फैसला 3:2 रहा। गौरतलब है कि चीफ जस्टिस का आज आखिरी वर्किंग डे भी है।

जस्टिस रवींद्र भट ने EWS कोटे पर अलग रुख अपनाया है। जस्टिस भट ने कहा कि संविधान सामाजिक न्याय के साथ छेड़छाड़ की अनुमति नहीं देता है। EWS कोटा संविधान के आधारभूत ढांचा के तहत ठीक नहीं है। जस्टिस भट ने कहा ये आरक्षण का लिमिट पार करना बेसिक स्ट्रक्चर के खिलाफ है। जस्टिस भट ने कहा कि आरक्षण देना कोई गलत नहीं लेकिन EWS आरक्षण भी एससी,एसटी और ओबीसी के लोगों को आरक्षण मिलना चाहिए।

जस्टिस जेबी पारदीवाला ने कहा कि EWS कोटा सही है। इसके साथ ही EWS कोटा को सुप्रीम कोर्ट की लगी मुहर। मैं जस्टिस माहेश्वरी और जस्टिस त्रिवेदी के फैसले के साथ हूं। उन्होंने अपने फैसले में कहाकि मैं EWS संशोधन का सही ठहराता हूं। जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि हालांकि EWS कोटा को अनिश्चितकाल के लिए नहीं बढ़ाना चाहिए।

जस्टिस बेला त्रिवेदी ने अपने फैसले में कहा कि संविधान का 103वां संशोधन सही है। एससी, एसटी और ओबीसी को तो पहले से ही आरक्षण मिला हुआ है। इसलिए EWS आरक्षण को इसमें शामिल नहीं किया जा सकता है। इसलिए सरकार ने 10 फीसदी अलग सेआरक्षण दिया। EWS कोटा के खिलाफ जो याचिकाएं थी, वो विफल रहीं।

जस्टिस दिनेश माहेश्वरी का फैसला-
 हमने समानता का ख्याल रखा है। क्या आर्थिक कोटा आर्थिक आरक्षण देने का का एकमात्र आधार हो सकता है। आर्थिक आधार पर कोटा संविधान की मूल भावना के खिलाफ नहीं है।

5 जजों की बेंच ने सुनाया फैसला

चीफ जस्टिस ललित, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी, जस्टिस रवींद्र भट, जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने यह फैसला सुनाया। चार जजों ने अलग-अलग फैसला पढ़ा। चीफ जस्टिस ललित ने कहा कि चार फैसले पढ़ने जा रहे हैं।

क्या था पूरा मामला, समझिए

सुप्रीम कोर्ट आज 103वें संविधान संशोधन की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाएगा। इसमें प्रवेश और सरकारी नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के व्यक्तियों को 10 फीसदी आरक्षण प्रदान किया गया है। पीठ ने 27 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इस मामले में मैराथन सुनवाई लगभग सात दिनों तक की थी। इसमें याचिकाकर्ताओं और (तत्कालीन) अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ईडब्ल्यूएस कोटे का बचाव किया था।

याचिका में क्‍या द‍िए गए थे तर्क, जानिए

इससे पहले गोपाल ने तर्क दिया था कि 103वां संविधान संशोधन के साथ धोखा है। जमीनी हकीकत यह है कि यह देश को जाति के आधार पर बांट रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संशोधन सामाजिक न्याय की संवैधानिक दृष्टि पर हमला है। उनके राज्य में, जो केरल है, उन्हें यह कहते हुए खुशी नहीं है कि सरकार ने ईडब्ल्यूएस के लिए एक आदेश जारी किया और शीर्षक जाति था और वह सभी देश की सबसे विशेषाधिकार प्राप्त जातियां थी।