रक्षाबंधन के पावन अवसर पर दो कवित्त छन्द

1.
रक्षाबंधन का है त्यौहार भाई बहिन का,
बहिनों की लाज रखने का प्रण लीजिये।

बहिन जो बाँधे रक्षासूत्र भाई की कलाई,
उस रक्षासूत्र का हमेशा मान कीजिये।

राखी बाँधने की रस्म पीढ़ियों से चली आयी,
पावन परम्परा का निरबाह कीजिये।

भाई और बहिन का प्रेम होता है पवित्र,
बहिनों की लाज हेतु निज प्राण दीजिये।

2.

रानी कर्मवती ने हुमायूँ को भेजी जो राखी,
मान उसी राखी का हुमायूँ ने बढ़ाया था।

मेवाड़ की रक्षा करने का देकर वचन,
फर्ज भाई होने का हुमायूँ ने निभाया था।।

तब से पवित्र रक्षा सूत्र का चलन हुआ,
खुशियों का पर्व जन जन ने मनाया था।

हिन्दू और मुसलिम कौमी एकता का भाव
रानी के पवित्र राखीसूत्र ने दिखाया था।

                                                                                                             हरिभान सिंह “हरि”
                                                                                                             सादाबाद, हाथरस