होम धार्मिक रुद्राभिषेक से करें शिव की आराधना, जानें रुद्राभिषेक से लाभ

रुद्राभिषेक से करें शिव की आराधना, जानें रुद्राभिषेक से लाभ

90
0

हाथरस 30 जुलाई | सावन माह शिव की अराधना के लिए शास्त्रों में सर्वोतम माना गया है। क्योंकि श्रावण मास देवाधिदेव महादेव को बहुत प्रिय है। जिसमें छ: तत्लों का समावेश होता है। विद्वानों के अनुसार शिव को प्रसन्न करने का सर्वोच्च उपाय रुद्राभिषेक है। साक्षात देवी देवता भी शिव कृपा के लिए शिव शक्ति के ज्योति-स्वरूप का रुद्र शक्ति के ज्योति स्वरूप का अभिषेक करते हैं। भारतीय संस्कृति में वेदों का अपना वैज्ञानिक महत्व है इनके ही श्लोकों से पूजा-यज्ञ अभिषेक आदि किया जाता है शिव से ही सब है और सब में शिव है। शिव महादेव, हरि विष्णु, ब्र्रह्म, रुद्र, नीलकंठ आदि सब ब्रह्म के पर्यायवाची हैं रुद्र अर्थात जो दुखो: को दूर करे वही रुद्र है। रुद्राभिषेक में शिवलिंग की विधिवत पूजा की जाती है रुद्र के पूजन से सब देवताओं की पूजा स्वत: संपन्न हो जाती है। प्राचीनकाल से रुद्र की उपासना होती आ रही है शास्त्रों में विविध कामनाओं की पूर्ति हेतु रुद्राभिषेक के लिए विभिन्न द्रव्यों का उपयोग किया जाता है।

रुद्राभिषेक से लाभ –

सामान्य जल से अभिषेक करने से वर्सा होती है। असाध्य रोगों का शांत करने के लिए कुशोदक से रुद्राभिषेक करें। लक्ष्मी प्राप्ति तथा व्यापार में वृद्धि प्राप्त करने की इच्छा से गन्ने के रस से अभिषेक करना चाहिये।

भवन, वाहन प्राप्त करने की इच्छा से दही से अभिषेक करें। धन वृद्धि और उन्नाति के लिए शहद एवं घी से रुद्राभिषेक करें। तीर्थ के जल से रुद्राभिषेक करने से मोक्ष का मार्ग प्रहस्त होता है। पुत्र की कामना के लिये दूध से अभिषेक करें। रोगादि शमन के लिए शीतल जल से रुद्राभिषेक करें। सहस्त्रनाम मंत्रों का उच्चारण करते हुए घृत की धार से रुद्राभिषेक करने पर वंश का विस्तार होता है। बच्चों के यशस्वी भविष्य के लिए दुग्ध और तीर्थ जल से अभिषेक करें। विद्वता के लिए शर से मिले दूध से अभिषेक करें। शत्रु के नाश के लिए सरसों के तेल से अभिषेक करें, इस प्रकार विभिन्ना द्रस्यों से शिवलिंग का विधिवत अभिषेक करने से अभिष्ट की प्राप्ति होती है।

रुद्राभिषेक का महत्व –

सभी शिवभक्तों को यजुर्वेद विहित विधान से रुद्राभिषेक करना चाहिये। रुद्राभिषेक से सभी काम सिद्ध होते हैं। असंभव भी संभव हो जाता है प्रतिकूल ग्रह स्थिति अथवा अशुभ ग्रह दशा से उन्पन्ना होने वाले अनिष्ट का भी शमन होता है।

शिव चन्द्रमा को अपने सिर पर धारण करते हैं और चंद्रमा ज्योतिष में मन का कारक है किसी भी प्रकार की मानसिक समस्या को दूर करने में रुद्राभिषेक सहायक होता है गंभीर किस्म की बीमारियां दूर करने एवं उनके होने हेतु रुद्राभिषेक करवाना लाभप्रद होता है। रुद्राभिषेक से मानव जीवन सात्विक और मंगलमय बनता है रुद्राभिषेक से अंत:करण की अपवित्रता एवं कुसंस्कारों के निवारण के उपरांत धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है।

रुद्राभिषेक से असाध्य कार्य भी साध्य हो जाते हैं, सर्वदा सर्वत्र विजय प्राप्त होती है। भगृसंहिता के अनुसार श्रावण माह में भ्ागवान ॐ शंकर के पास ब्रह्म की सारी शक्तियां समाहित रहती हैं सावन महीने में किया गया जलाभिषेक अन्य दिनों की अपेक्षा हजार गुना अधिक फलदायी है। अपने भोले स्वभाव के कारण शिव जी को भोले के नाम से भी जाना जाता है। यही कारण है कि शिव की आराधना पूज व्रत में कडे नियम का पालन नही करना पडता हैं। भगवान शिव की उपासना के सोमवार, प्रदोष, शिवरात्रि, के व्रत लिए जाते है और सावन के महीने में भगवान शिव व सोमवार व्रत का महत्व और भी बढ जाता है। इन व्रतों को यदि कुंवारी कन्या ले तो उनको मनचाहे वर की प्राप्ति होती है ऐसी मान्यता है। विवाहिताएं अपने पति की दीर्घ आयु के लिए इन व्रतों को रखती है। पुराणों के अनुसार सावन के महीने में सोमवार के दिन केवल एक समय में भोजन करना चाहिए। इस व्रत में भोले बाबा के साथ-साथ मां पार्वती जी की आराधना की जाती है। शिवजी जी को तरह-तरह के नैवेद्य अर्पित किए जाने चाहिए जैसे दूध, जल, चीनी, फल, बेलपत्र। अन्य व्रत की तरह ही इसमें भी रात्रि के समय ही भोजन करना चाहिए। सावन के महीने में प्रथम सोमवार से व्रत प्रारम्भ करके पूरे सोलह सोमवार या नौ सोमवार तक ले कर इनका उद्यापन करना चाहिए। यदि सोलह या नौ पूरे लेने में आप असमर्थ हैं, तो आप केवल सावन के चार ही व्रत ले सकते है। इनमें सूर्योदय के बाद केवल तीन पहर ही अर्थात नौ घण्टे ही उपवास रखना चाहिए।

Skip to toolbar