प्रोमिस डे पर विष्णु सक्सेना की कलम से कुछ खास-

हम हैं शीशे से टूट जाएंगे, तुम न आये तो रूठ जाएंगे, कोशिशें कामयाब होती है- वादे जितने हैं टूट जाएंगे। मेरे सांचे में ढल के देख ज़रा, दो...

आज चॉकलेट डे पर प्रसिद्द कवि विष्णु सक्सेना की कविता

बुझ न पाए वो प्यास मत देना, कोई लम्हा उदास मत देना, घोल दे ज़िंदगी मे कड़वाहट- ऐसी मुझको मिठास मत देना। द्वार जब दिल के खोल देती...

यशोधरा यादव ‘यशो’ का नव गीत “सम्बोधनों के मौन”

हो गये हैं शब्द क्यों सम्बोधनों के मौन . खींचता नैराश्य जग में जिन्दगी को कौन. खिलखिलाहट हो गई गुजरे समय की बात , अब नहीं होती...

प्रपोज डे पर कवि विष्णु सक्सेना की एक रचना

अश्क आंखों से आज बहने दो, अपना हर दर्द मुझको सहने दो, उम्र भर तुमसे जो न कह पाया आज वो बात मुझको कहने...

अवशेष मानवतावादी का गीत – फिर भी ईश्वर के होने का होता है अहसास

ना तो कोई भी सबूत है ना गवाह है पास। फिर ईश्वर भी के होने का होता है अहसास।। तोड़ तोड़कर कण को हमने कण कण में तोड़ा। फिर...

सुरजीत मान जलईया सिंह की नई रचना ” प्रधान ”

पीठ पीछे जानता है क्या क्या कहते लोग हैं? सामने आता नहीं है कोई भी रघुराज के। जीतकर आया प्रधानी रोब थानेदार का। रोज दुगना बढ़ रहा है...

शिव कुमार ‘दीपक’ की बाल रचना

झूला लेकर आया सावन । हरियाली ले वर्षा आयी । बच्चों ने ली मन अंगड़ाई ।। दादुर पपिहा नाचे मोर । काली कोयल करे कनकोर ।। धानी चूँदर...

कार के करिश्मे: काका हाथरसी

रोजाना हम बंबा पर ही घूमा करते उस दिन पहुँचे नहर किनारे वहाँ मिल गए बर्मन बाबू बाँह गले में डाल कर लिया दिल पर काबू कहने लगे- क्यों...

कु० राखी सिंह शब्दिता द्वारा रचित सरस्वती वंदना

शारदे माँ शारदे तू , ज्ञान हम पर वार दे । दूर कर अज्ञान का तम, अब जहां को तार दे ।। वंदना से आरती हो,...

5 सितम्बर शिक्षक दिवस पर प्रियंका खन्ना अरोरा की कविता : शिक्षक – एक...

शिक्षक: एक पदवी। कितने सारे सालों का अनुभव , फिर भी बहुत कुछ सीखना बाकी है। शिक्षक है एक पदवी ऐसी , जो हर दिन कुछ...

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