
हाथरस 09 जून । जिले के लिए गौरव का विषय है कि जिले के प्रख्यात साहित्यकार एवं चर्चित बाल साहित्यकार त्रिलोक सिंह ठकुरेला की रचनाएँ अब देश के विभिन्न अहिन्दी भाषी क्षेत्रों के छात्र भी पढ़ेंगे। नई शिक्षा नीति (NEP) एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा के अनुरूप ‘मधुवन’ द्वारा प्रकाशित विभिन्न हिन्दी पाठ्यपुस्तकों में उनकी बाल कविताओं और रचनाओं को स्थान दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि हाथरस जिले की सासनी तहसील के नगला मिश्रिया नामक गाँव में जन्मे त्रिलोक सिंह ठकुरेला चर्चित साहित्यकार एवं प्रख्यात कुण्डलियाकार हैं।कक्षा-4 की हिन्दी पाठ्यपुस्तक ‘मधु मुखर हिन्दी पाठमाला-4 में त्रिलोक सिंह ठकुरेला की कविता ‘उपवन के फूल’, कक्षा-6 की हिन्दी पाठ्यपुस्तक ‘मधु मुखर हिन्दी पाठमाला-6’ में ‘नया सवेरा लाना तुम’, कक्षा-7 की हिन्दी पाठ्यपुस्तक ‘उज्ज्वला हिन्दी पाठमाला-7 में ‘कठपुतली’ , कक्षा-8 की हिन्दी पाठ्यपुस्तक ‘उज्ज्वला हिन्दी पाठमाला-8’ में ‘मेरी बिटिया’, कक्षा-4 की हिन्दी पाठ्यपुस्तक ‘हॅंसते गाते सीखें हिन्दी-4’ में ‘औरों के दुःख हरना, कक्षा-6 की हिन्दी पाठ्यपुस्तक ‘हॅंसते गाते सीखें हिन्दी-6’ में ‘अच्छे काम’ तथा कक्षा-5 की हिन्दी पाठ्यपुस्तक ‘नूतन गुंजन हिन्दी पाठमाला-5’ में ‘संकल्प’ नामक बाल कविताएँ सम्मिलित की गयी हैं। त्रिलोक सिंह ठकुरेला आज के समय के चर्चित बाल साहित्यकार और प्रख्यात कुण्डलियाकार हैं। त्रिलोक सिंह ठकुरेला की रचनाएँ राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद एवं महाराष्ट्र, केरल, आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा सहित अनेक राज्यों की हिन्दी पाठ्यपुस्तकों में सम्मिलित की गयी हैं। त्रिलोक सिंह ठकुरेला ने विभिन्न भारतीय भाषाओं के अनेक बाल कहानी संकलनों सहित दो दर्जन से अधिक पुस्तकों का सम्पादन किया है। समकालीन साहित्यकारों में त्रिलोक सिंह ठकुरेला की कुण्डलियाॅं कई पाठ्यपुस्तकों में सम्मिलित की गयी हैं। राजस्थान साहित्य अकादमी सहित विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत व सम्मानित त्रिलोक सिंह ठकुरेला ने बाल साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट सृजन किया है। ‘नया सवेरा’, ‘काव्यगंधा’, ‘समय की पगडण्डियों पर’, ‘आनन्द मंजरी’ और ‘सात रंग के घोड़े’ त्रिलोक सिंह ठकुरेला की चर्चित काव्य कृतियाँ हैं।























