मथुरा 09 जून । राधे-राधे उद्घोष के साथ के.डी. डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में इंडियन एसोसिएशन ऑफ ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल पैथोलॉजिस्ट्स के 23वें राष्ट्रीय पोस्ट ग्रेजुएट कन्वेंशन का समापन हो गया। तीन दिन के इस राष्ट्रीय स्नातकोत्तर ओरल पैथोलॉजी सम्मेलन में देश के कोने-कोने से आए 500 से अधिक पोस्ट-ग्रेजुएट डेलिगेट्स और वरिष्ठ संकाय सदस्यों ने अपने-अपने तरीके से बदलते दंत चिकित्सा स्वरूप और जांच तकनीकों पर प्रकाश डाला। सम्मेलन के मुख्य वैज्ञानिक सत्रों में ओरल पैथोलॉजी को क्लीनिकल प्रैक्टिस से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया।
केडी विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर मनोज अग्रवाल, कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी, इंडियन एसोसिएशन ऑफ ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल पैथोलॉजिस्ट्स के अध्यक्ष डॉ. नदीम जैदी, सचिव डॉ. गुरुराज और कोषाध्यक्ष डॉ. ललित प्रकाश चंद्र ने स्नातकोत्तर सम्मेलन की प्रशंसा करते हुए देशभर से आए पोस्ट-ग्रेजुएट डेलिगेट्स और वरिष्ठ संकाय सदस्यों के अनुभवों को अमूल्य बताया। प्रो-चांसलर मनोज अग्रवाल ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा में नवाचार और कौशल विकास बहुत जरूरी है। यह सम्मेलन दंत चिकित्सा क्षेत्र में कुछ नया करने की प्रेरणा देगा। कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी ने कहा कि सम्मेलन में तीन दिन तक विशेषज्ञों ने जो सुझाव दिए, उन पर प्रत्येक भावी दंत चिकित्सक को अमल करना चाहिए। के.डी. डेंटल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल की प्राचार्या डॉ. नवप्रीत कौर ने सम्मेलन की सराहना करते हुए कहा कि इस मंच पर साझा किए गए विचार और शोध देश में ओरल कैंसर एवं अन्य जटिल मुख विकारों की शुरुआती पहचान (अर्ली डायग्नोसिस) तथा इलाज में मील का पत्थर साबित होंगे। डॉ. कौर ने आयोजन सचिव डॉ. उमेश चंद प्रसाद की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके अथक प्रयासों से ही के.डी. डेंटल कॉलेज एक राष्ट्रीय सम्मेलन की सफल मेजबानी कर सका। उन्होंने डॉ. राम बल्लभ उपाध्याय, डॉ. अंकिता पटनाइक, डॉ. नदीम जैदी, डॉ. एन. गुरु राज, डॉ. ललित प्रकाश चंद्रा, डॉ. अलका डी. काले, डॉ. ज्योति पी. आदि की भी मुक्तकंठ से प्रशंसा की।
स्नातकोत्तर सम्मेलन की शुरुआत विशेष प्री-कन्वेंशन वर्कशॉप से हुई थी, जिसमें फोरेंसिक डेंटिस्ट्री (न्यायालयिक दंत चिकित्सा) पर व्यावहारिक हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग दी गई। इसके जरिए कानूनी व आपराधिक जांच में ओरल पैथोलॉजिस्ट की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला गया था। सम्मेलन के मुख्य वैज्ञानिक सत्रों में ओरल पैथोलॉजी को क्लीनिकल प्रैक्टिस से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया। इस दौरान भारत में एक गम्भीर स्वास्थ्य चिंता बन चुके ‘पोटेंशियल मैलिग्नेंट डिसऑर्डर’ (कैंसर-पूर्व लक्षण) और ओरल कैंसर (मुख का कैंसर) के क्षेत्र में हो रहे नए विकास और आधुनिक जांच तकनीकों पर गहन मंथन हुआ। सम्मेलन का मुख्य आकर्षण एक विशेष ‘स्लाइड सेमिनार’ रहा, जिसमें मुख और जबड़े (ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल) से जुड़े अत्यंत दुर्लभ और अनूठे मामलों को प्रदर्शित किया गया। इसके तुरंत बाद “डिकोडिंग ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल डिसऑर्डर्स” विषय पर एक कड़ा पैनल डिस्कशन हुआ। सम्मेलन में पीजी छात्र-छात्राओं द्वारा 500 से अधिक नवीनतम रिसर्च पेपर और पोस्टर प्रस्तुत किए गए, जो दंत चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे उच्चस्तरीय शोध को दर्शाते हैं। सम्मेलन में देश के प्रख्यात ओरल पैथोलॉजिस्ट्सों डॉ. अलका काले, डॉ. रंगनाथन, डॉ. राजीव देसाई, डॉ. सुब्रमण्यम, डॉ. गोविंदराज, डॉ. आनंद और डॉ. जयंती आदि ने अपना बहुमूल्य योगदान दिया। राष्ट्रीय सम्मेलन की सफलता में डॉ. पुण्य गादी राव, डॉ. चेतन, डॉ. पूजा कामत, डॉ. विजय वाधवान, डॉ. प्रीति शर्मा, डॉ. एकता विश्नोई, डॉ. कृष्णा सिरिशा, डॉ. जयशंकर, डॉ. श्रीधर, डॉ. कृष्णानंद, डॉ. शारदा, डॉ. अरविंदन, डॉ. रंगनाथन, डॉ. आरवी सुब्रमण्यम, डॉ. गोविंद राज, डॉ. आदित्य, डॉ. आनंद. डॉ. जयंती, डॉ. प्रिया, डॉ. उमा शर्मा, डॉ. नरेंद्र नाथ सिंह, डॉ. सुब्बुलक्ष्मी, डॉ. नीता, डॉ. दीपिका. डॉ. वरुण सूर्या, डॉ. विवेक, डॉ. मनीष भल्ला, दाऊ अर्जुन, कुंडू दाऊ, मेघानंद दाव, दीपक आदि का भी अहम योगदान रहा। स्नातकोत्तर सम्मेलन में अतिथि व्याख्यानों की कार्यवाही का संचालन डॉ. सुषमा ने किया। समापन अवसर पर इंडियन एसोसिएशन ऑफ ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल पैथोलॉजिस्ट्स के पदाधिकारियों की तरफ से पोस्टर और पेपर्स प्रजेंटेशन करने वाले विजेता-उप-विजेता पोस्ट-ग्रेजुएट डेलिगेट्स को सम्मानित किया गया। आयोजन सचिव डॉ. राम बल्लभ उपाध्याय ने राष्ट्रीय स्नातकोत्तर सम्मेलन की सफलता के लिए के.डी. डेंटल कॉलेज के विभागाध्यक्षों डॉ. अजय नागपाल, डॉ. शैलेन्द्र सिंह चौहान, डॉ. सिद्धार्थ सिंह सिसोदिया, डॉ. सोनल, डॉ. विनय मोहन, डॉ. अभिषेक, डॉ. अनुज गौर, डॉ. राजीव, डॉ. प्रेरणा, डॉ. नेहा, डॉ. अनुश्री तथा प्रशासनिक अधिकारी नीरज छापड़िया आदि के सहयोग के लिए आभार माना।


























